मुख्य संकेतकों का रुझान
ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, लिवर फ़ंक्शन, किडनी फ़ंक्शन और दूसरे संकेतक तारीख के क्रम में दिखते हैं, साथ में उनकी रेफ़रेंस रेंज और रिपोर्ट पर लगे फ़्लैग भी। तुलना योग्य मान रुझान ग्राफ़ बनाते हैं, और मूल मान कभी भी देखे जा सकते हैं।

स्वास्थ्य समस्या के हिसाब से व्यवस्थित
डॉक्टर की विज़िट, जाँच, दवाएँ और स्कैन अपनी स्वास्थ्य समस्या के तहत रहते हैं, जैसे क्रॉनिक हेपेटाइटिस B या हाई कोलेस्ट्रॉल, ताकि हर समस्या का अपना साफ़ इतिहास बने।

दवाएँ और जाँच के नतीजे साथ-साथ
हर दवा कैसे लेनी है और कब शुरू व बंद हुई, यह दर्ज करें। दवाएँ और जाँच के नतीजे एक ही रिकॉर्ड में होने से फ़ॉलो-अप पर डॉक्टर को पूरी बात बताना आसान होता है।

मुलाक़ात से पहले का सारांश
पर्याप्त रिकॉर्ड जमा होने पर फ़ॉलो-अप से पहले सारांश बना सकते हैं। इसमें हाल के नतीजों और दवाओं में आए बदलाव होते हैं, साथ में मूल रिकॉर्ड के संदर्भ भी, ताकि आप मिलान कर सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह किन पुरानी बीमारियों के लिए है?
हर उस स्थिति के लिए जिसमें नियमित फ़ॉलो-अप जाँच ज़रूरी हो, जैसे हाई बीपी, डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल, लिवर की पुरानी बीमारी, थायराइड और किडनी की पुरानी बीमारी।
क्या अलग-अलग अस्पतालों के नतीजे एक साथ देख सकते हैं?
हाँ। एक ही जाँच के अलग-अलग अस्पतालों के नतीजे एक साथ दिखते हैं, हर एक अपनी इकाई और रेफ़रेंस रेंज के साथ। तुलना योग्य मान रुझान ग्राफ़ बनाते हैं, और मूल मान कभी भी देखे जा सकते हैं।
क्या यह फ़ॉलो-अप जाँच की याद दिलाएगा?
हाँ। मेडिकल रिकॉर्ड में लिखी फ़ॉलो-अप योजना की आप पुष्टि करें, तो उसका रिमाइंडर बन जाता है। तय तारीख से पहले आपको और इस सदस्य की देखभाल में साथ देने वाले दूसरे खातों को सूचना भेजी जाती है।
